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Jo Talaas Thi Meri
पूरी ना हो सकी , जो तलाश थी मेरी जिसपे आके रोए तुम , वो लाश थी मेरी
हम बीमार हुए थे , कुछ इस तरह तू ही दर्द मेरा , तू ही दवा थी मेरी
नफ़रत करते रहे तुम मुझे ग़लत समझकर जो ग़लत समझा तुमने ,वो महोब्बत थी मेरी
तुमने तो कोशिश की , मुझे हर वक़्त रुलाने की पर हंसके गम झेलना , आदत थी मेरी
जब निकला था जनाज़ा "प्रवीण" का , तेरे घर के सामने से तुमने समझा , वो बारात थी मेरी ||
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